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यदि आप अश्वथामा के बारे में कुछ अलग कहानी पढ़ना चाहते हैं तो, पहले अध्याय को केवल इस कहानी का आधार समझ कर पढ़ें। मेरा पूर्ण विश्वास है कि दूसरे अध्याय के समाप्त होते-होते आपको आभास होगा कि, यह वही पुरानी कहानी नहीं है, जहां माथे से खून बहते, बीमार अश्वथामा अभी भी लोगों को दिखाई देते हैं।